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कांवड़ मेला 2026 को लेकर मुख्य सचिव ने ली इंटरस्टेट मीटिंग

हरिद्वार। 30 जुलाई से शुरू होने वाले कांवड़ मेले 2026 की तैयारियों को लेकर शुक्रवार को कई राज्यों के आलाधिकारियों ने चिंतन किया। हरिद्वार के मेला नियंत्रण भवन में उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में यूपी, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, राजस्थान समेत कई राज्यों के अधिकारियों ने बैठक की। बैठक में कांवड़ मेले के समय आपसी समन्वय पर जोर दिया गया। बैठक में कांवड़ियों की भीड़, उनके रूट और सुरक्षा को लेकर भी मंथन हुआ।
बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने कहा कि कांवड़ मेला हमेशा चुनौती भरा होता है और हरिद्वार इसका केंद्र होने के कारण सबसे ज्यादा यहीं फोकस होता है। लिहाजा सभी राज्य आपसी सहयोग से इसे सकुशल संपन्न करेंगे।
उन्होंने बताया कि कांवड़ मेला उत्तर भारत का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन होता है, जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन की होती है। मेले की दिव्य भव्य तैयारियां की जा रहीं है। उत्तराखंड के साथ-साथ निकटवर्ती राज्यों के अधिकारियों से भी समन्वय बनाया गया है। सभी पड़ोसी राज्य के अधिकारियों के साथ बैठक कर कांवड़ मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा की गई है। कांवड़ मेले में सभी राज्य एक दूसरे का सहयोग करेंगे।
मुख्य सचिव ने कहा कि सबसे बड़ा मुख्य बिंदु रियल टाइम इन्फॉर्मेशन शेयर है। मेले के दौरान आने वाली भीड़ की वास्तविक स्थिति और सूचनाओं का सभी राज्य एक दूसरे को शेयर करेंगे, ताकि मेले में कोई व्यवधान पैदा न हो। बैठक के दौरान तय किया गया कि हर साल की तरह इस साल भी कावड़ मेले के दौरान भाला, त्रिशूल, बेसबॉल के डंडे और अन्य धारदार हथियार बैन रहेंगे। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने बताया कि सभी राज्य इस पर सहमत भी हैं। नई तकनीक के आधार पर सुविधाएं दी जाएंगी। पूर्व की भांति इस बार भी कोई व्यवस्था में परिवर्तन नहीं किया गया है।
मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने कांवड़ मेले में हरिद्वार आने वाले कांवड़ियों से अपील की है कि वो पूरी श्रद्धा के साथ हरिद्वार आएं और व्यवस्थाओं में प्रशासन का सहयोग करें। सनातन धर्म की परम्पराओं के अनुसार हरिद्वार से शांतिपूर्वक गंगाजल भटकर अपने गंतव्यों को लौटें।
उन्होंने कहा कि किसी भी असामाजिक तत्व को अपने बीच में न घुसने दें और यदि कोई ऐसी अवांछनीय तत्व बीच में घुसता है तो तत्काल लोकल प्रशासन को इसकी सूचना दी जाएं। गौरतलब है कि कांवड़ मेला उत्तर भारत का एक बड़ा धार्मिक आयोजन है, जिसमें पिछली बार चार करोड़ से अधिक कांवड़िए हरिद्वार आए थे। अनुमान है कि इस बात यह आंकड़ा बढ़ेगा और उसी को ध्यान में रखते हुए मेले की तैयारियां की जा रही हैं।

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