अन्य खबरेंगढ़वाल मंडल

विरासत महोत्सव में क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल के नाम रहा शनिवार का दिन

देहरादून। विरासत महोत्सव-2026 में शनिवार को द्वितीय सत्र के दौरान क्राइम लिट्रेचर फेस्टिवल कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें कि उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी अशोक कुमार सहित कई ऑफिसर्स हस्तियों ने प्रतिभाग करते हुए अनेक अपराधिक घटनाओं एवं मानवाधिकारों को लेकर जन जागरूकता के विषय में महत्वपूर्ण टिप्स दिए। रीच संस्था द्वारा आयोजित किए जा रहे इस 15 दिवसीय विरासत महोत्सव में भारत की ऐतिहासिक धरोहरों को जहां जी-जान लगाकर संकलित किया जा रहा है, वहीं जन जागरूकता से संबंधित और भी कई महत्वपूर्ण से महत्वपूर्ण जानकारियां दिए जाने का सिलसिला चल रहा है। इसी के तहत आज शनिवार को क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल आयोजित किया गया, जो कि अनेक आपराधिक घटनाओं एवं मानव अधिकार आयोग में निहित अधिकारों को लेकर जागरूक करने की महत्वपूर्ण जानकारियां आला अफसरों द्वारा दी गयीं।
विरासत के मंच पर यह क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल का कर्टेन रेजर कार्यक्रम विरासत के सभी मेहमानों के लिए काफी महत्वपूर्ण रहा। दून कल्चरल एंड लिटरेरी सोसाइटी द्वारा प्रस्तुत इस कार्यक्रम में अपराध साहित्य, भारतीय पुलिस व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा और अपराध मनोविज्ञान से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ और रिटायर्ड पूर्व डीजीपी अशोक कुमार ने इन्हीं बिंदुओं को लेकर अपने अनुभवों को साझा किया। कार्यक्रम की शुरुआत “द जर्नी सो फार, द रोड अहेड” सत्र से हुई, जिसमें अशोक कुमार, आलोक लाल और रूपा सोनी ने फेस्टिवल के चार वर्षों के सफर, उपलब्धियों, रोचक संवादों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की। तत्पश्चात “सिक्योरिंग टुमारो” सत्र में भारत की आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई, आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों, क्षमताओं और आगे की राह पर विचार किया गया। यह चर्चा अशोक कुमार की पुस्तक चैलेंजेज टू इंटरनल सिक्योरिटी ऑफ इंडिया (आठवां संस्करण) पर आधारित रही। सत्र में पूर्व डीजीपी, उत्तराखंड अशोक कुमार ने जहां वक्ता के रूप में शिरकत की, तो वहीं वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्मकार सतीश शर्मा के साथ संवाद कार्यक्रम भी आयोजित हुआ, जो कि काफी महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक रहा। आज के इस क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल में “बिहाइंड द बैज” सत्र के दौरान यशोवर्धन आजाद और ताज हसन ने भारतीय पुलिस व्यवस्था के अनुभवों और उसके भीतर की कहानियों पर चर्चा की। इस संवाद का संचालन अनुपमा खन्ना ने बहुत ही ओजस्वीतथा ज्ञानवर्धक रूप में किया।
जबकि “द लॉन्ग आर्म ऑफ द लॉ” सत्र में आलोक लाल और मानस लाल ने कानून की पहुंच और अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकानों की अनुपस्थिति पर विचार साझा किए। इस सत्र में आरजे काव्या ने भी अपना अनुभव साझा किया। कार्यक्रम के अगले सत्र “इनसाइड द क्रिमिनल माइंड” में निजी जासूस देव की भागीदारी भी रही। डॉ. रूबी गुप्ता के साथ बातचीत में प्रेम, विश्वासघात, जुनून और प्रतिशोध जैसे विषयों के माध्यम से अपराधी मनोविज्ञान पर चर्चा की गई।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button