अगस्त क्रांति दिवस पर पर्यटको के लिए खोली गई भारत की आजादी के आन्दोलन की गवाह अल्मोड़ा जेल

अल्मोड़ा। रविवार को भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ मनाई गयी। इस ऐतिहासिक मौके पर अल्मोड़ा जिला जेल में अगस्त क्रांति दिवस पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। साथ ही भारत के स्वतंत्रता संग्राम की यादों से रूबरू होने के लिए जेल के दरवाजे पर्यटकों के लिए के खोले गए।
इस मौके पर अल्मोड़ा के विधायक मनोज तिवारी ने कहा आज पूरे देश में बहुत खुशी और जश्न का माहौल है। आज हम अगस्त क्रांति दिवस मना रहे है। हमारे बच्चे सांस्कृतिक कार्यक्रम करते हैं। देशभक्ति के गीत गाते हैं, जबकि यहां मौजूद अन्य लोग बच्चों को उस दौर के इतिहास और भावना को समझने में मदद करते हैं। हम भविष्य में जिला जेल को दूसरी जगह ले जाने की कोशिश करेंगे। जिससे हम इस जगह को पर्यटकों के लिए खोल सकें। जिससे वे इसे देख सकें।
अल्मोड़ा के विधायक मनोज तिवारी ने कहा कि आने वाली पीढ़ी अगस्त क्रांति दिवस के इतिहास के बारे में जान सकें इसके लिए प्रयास किये जाएंगे। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से इसे एक म्यूजियम में बदला जाना चाहिए। इसे खोलने से आने वाले लोगों को बहुत फायदा होगा। ऐसी ऐतिहासिक जगहों का पर्यटकों के लिए हमेशा से ही बड़ा आकर्षण रहा है। खासकर इसलिए क्योंकि आजादी की लड़ाई के दौरान महान हस्तियों ने यहां समय बिताया था। बता दें उत्तराखंड की सबसे पुरानी जेल अल्मोड़ा की जेल है। इस जेल में पंडित नेहरू दो बार रहे है। इनके अलावा भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत, खान अब्दुल गफ्फार खां सहित 7 लोग इस जेल में रहे। स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी हुई अनेक यादें यहा रखी है। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने मेरी आत्मकथा के कुछ अध्याय इसी जेल में लिखे थे। इस जेल में स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों की अनेक यादें संरक्षित है। यहां स्थित नेहरू वार्ड में उनके खाने के बर्तन, चरखा, दीपक, चारपाई सहित पुस्तकालय भवन, भोजनालय आदि है। अगस्त क्रांति के अवसर पर हर वर्ष 9 अगस्त को इस जेल के नेहरू वार्ड में अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस जेल को संरक्षित कर इसे हैरिटेज के रूप में विकसित करने की लंबे समय से मांग भी उठ रही है।


