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आत्मशुद्धि और जीवन में उत्तम गुणों को आत्मसात करने का दिया संदेश

देहरादून। दिगंबर जैन समाज का पावन दशलक्षण महापर्व 16 सितंबर से 25 सितंबर तक परम पूज्य आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमति माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में देहरादून नगरी में भव्यता एवं श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। दस दिवसीय यह महापर्व आत्मशुद्धि तथा जीवन में उत्तम गुणों को आत्मसात करने का संदेश देता है। रविवार को प्रातःकालीन नियमित क्रियाओं के साथ श्रीजी का पूजन, प्रक्षाल एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इसी क्रम में आगामी अनंत चतुर्दशी की भव्य शोभायात्रा के लिए विभिन्न पात्रों के चयन हेतु जैन समाज के श्रद्धालुओं द्वारा बोलियां लगाई गईं। अनंत चतुर्दशी की मंगल बेला पर जैन भवन से नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा में श्रीजी के खवासी, सारथी एवं कुबेर आदि के लिए सौभाग्यशाली पात्रों का चयन बोलियों के माध्यम से किया गया। इसके पश्चात आत्मबोध संस्कार शिविर का आयोजन हुआ तथा श्रद्धालुओं ने आहारचर्या का लाभ लिया।
इस अवसर पर पूज्य गुरु मां पूर्णमति माताजी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि उत्तम सत्य धर्म जैन धर्म के पर्युषण पर्व अर्थात दशलक्षण महापर्व का पांचवां धर्म है। मन, वचन और कर्म से सत्य एवं पवित्र आचरण करना ही उत्तम सत्य धर्म है। उन्होंने कहा कि केवल सच बोलना ही सत्य नहीं है, बल्कि सत्य को मधुर, प्रिय एवं दूसरों के कल्याणकारी भाव के साथ बोलना चाहिए। किसी को कष्ट पहुंचाने वाले कटु एवं कठोर वचनों का त्याग करना आवश्यक है। माताजी ने कहा कि सत्य विश्वास का आधार है। सत्यवादी व्यक्ति पर समाज में सभी विश्वास करते हैं और उसका मान-सम्मान बढ़ता है। सत्य के पालन से जीवन के अनेक दोष एवं विकार दूर होते हैं तथा मन और आत्मा की शुद्धि होती है। सत्य के मार्ग पर चलना आत्मकल्याण एवं मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग है।
दोपहर 2 बजे दिगंबर जैन महासमिति अंचल द्वारा मंगलाचरण किया गया।
इसी क्रम में श्री वर्णी जैन इंटर कॉलेज, देहरादून द्वारा श्री मिट्ठन लाल सुरेश चंद जैन वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन श्री वर्णी जैन विद्यालय परिसर में किया गया। प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि डॉ. संजय जैन (ओएनजीसी) रहे। प्रतियोगिता का विषय “निःशुल्क सरकारी सुविधाएं आत्मनिर्भरता को प्रभावित करती हैं” रहा। विद्यार्थियों ने विषय के पक्ष एवं विपक्ष में अपने विचार प्रस्तुत किए।
रविवार शाम 7रू15 बजे गुरु भक्ति के पश्चात आदरणीय रितु दीदी द्वारा ध्यान एवं भक्ति साधना कराई गई। इसके बाद श्री महावीर जैन कन्या पाठशाला के बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत “सुख की खोज” नाटिका प्रस्तुत की गई। नाटिका के माध्यम से बच्चों ने सुख के वास्तविक स्वरूप एवं आत्मिक शांति का सुंदर संदेश दिया। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए मीडिया समन्वयक मधु जैन ने बताया कि 21 सितंबर को दोपहर 2 बजे जैन मंदिर, क्लेमेंट टाउन द्वारा विशेष नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। इस अवसर पर श्री विद्या-समय-पूर्ण वर्षायोग समिति, सकल दिगंबर जैन समाज देहरादून के पदाधिकारी, विभिन्न संस्थाओं के सदस्य एवं पदाधिकारी, जैन भवन कार्यकारिणी के सदस्य तथा विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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