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आध्यात्मिक क्रिकेट महोत्सव में रोमांच चरम पर, दिल्ली, गाजियाबाद, हरिद्वार और विकासनगर सेमीफाइनल में

देहरादून। आध्यात्मिक श्रमणी परम पूज्य वात्सल्यमयी आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमति माताजी के पावन सान्निध्य में सकल दिगंबर जैन समाज एवं श्री विद्या समय पूर्ण वर्षा योग समिति की ओर से आयोजित आध्यात्मिक क्रिकेट महामहोत्सव के दूसरे दिन रोमांचक मुकाबले देखने को मिले। देहरादून स्थित जैन भवन स्टेडियम में आयोजित प्रतियोगिता में दिल्ली, गाजियाबाद, हरिद्वार और विकासनगर की टीमों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में प्रवेश किया। आयोजन पुण्यार्जक श्रीमती तारिका पाटनी के सहयोग से किया जा रहा है। महामहोत्सव के दूसरे दिन प्रातः सात बजे नित्य नियम पूजन एवं मंदिर जी में शांतिधारा का आयोजन किया गया। आचार्य श्री के चरणों में अर्घ्य समर्पित करने की श्रृंखला में दो अक्टूबर को जैन मिलन शिवालिक एवं वीरांगना मंच तथा तीन अक्टूबर को जैन मिलन ज्योति माजरा की ओर से अर्घ्य अर्पित किए गए। मीडिया समन्वयक मधु जैन ने बताया कि रविवार को प्रातः सात बजे बालिका मंडल एवं वीर विद्या युवा मंडल द्वारा श्री जी को अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे।
महामहोत्सव के दूसरे दिन चार रोमांचक क्रिकेट मुकाबले खेले गए। दिल्ली की टीम ने इंदौर को पराजित कर जीत दर्ज की, जबकि गाजियाबाद ने तमिलनाडु को हराया। हरिद्वार ने रोमांचक मुकाबले में ग्वालियर को शिकस्त दी। वहीं विकासनगर ने आगरा को पराजित कर सेमीफाइनल में स्थान बनाया। सेमीफाइनल में दिल्ली, गाजियाबाद, हरिद्वार और विकासनगर की टीमें आमने-सामने होंगी। मुकाबलों के दौरान खिलाड़ियों ने खेल कौशल के साथ अनुशासन, टीम भावना और सकारात्मक प्रतिस्पर्धा का परिचय दिया।
पूज्य गुरु मां श्री पूर्णमति माताजी ने आध्यात्मिक क्रिकेट महामहोत्सव के माध्यम से युवाओं को खेल और धर्म के सुंदर समन्वय का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में पुरानी लीक से हटकर सकारात्मक एवं रचनात्मक सोच अपनाने की आवश्यकता है। खेल युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा देने के साथ उन्हें धर्म, संस्कार और समाज से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
उन्होंने कहा कि खेल को केवल प्रतिस्पर्धा या व्यवसाय का माध्यम न मानकर साधर्मी वात्सल्य, आपसी प्रेम, एकजुटता और संस्कारों को मजबूत करने का माध्यम बनाया जाना चाहिए। खेल के मैदान में भी क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों पर नियंत्रण रखना जरूरी है। जीत-हार के अहंकार से ऊपर उठकर शांत भाव से खेलना और आत्मसंयम बनाए रखना ही वास्तविक सफलता है। उन्होंने युवाओं से धन और समय का सदुपयोग करते हुए धर्म, ज्ञान, संस्कार एवं सत्कार्यों से जुड़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम समन्वयक अंकुर जैन ने बताया कि प्रतियोगिता में खिलाड़ियों के सामने करीब सौ धार्मिक प्रश्नों को याद रखने और उनका उत्तर देने की चुनौती रखी गई है। इसका उद्देश्य उन युवाओं को भी धर्म एवं समाज से जोड़ना है, जो नियमित रूप से मंदिर अथवा धार्मिक गतिविधियों में शामिल नहीं हो पाते। प्रतियोगिता में एक विशेष रोमांच भी जोड़ा गया है। खिलाड़ी को गेंद को बल्ले से स्पर्श करने के साथ निर्धारित धार्मिक प्रश्न का उत्तर भी देना होता है। इस अनूठे प्रयोग के माध्यम से खिलाड़ियों की एकाग्रता, निर्णय क्षमता, समस्या समाधान क्षमता और टीम भावना को विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
अंकुर जैन ने बताया कि टीम लीडर द्वारा गेंदबाज और बल्लेबाज का चयन करने से खिलाड़ियों में निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है। अलग-अलग परिस्थितियों में खिलाड़ियों के व्यवहार और प्रतिभा को सामने आने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता का उद्देश्य विभिन्न कौशलों को विकसित करने के साथ युवाओं को धर्म और समाज से जोड़ना है। आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमति माताजी के दिव्य सान्निध्य में आयोजित यह आध्यात्मिक क्रिकेट लीग इसी दिशा में सार्थक प्रयास है।
आगामी धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारियों को लेकर धर्मशाला प्रांगण में बैठक आयोजित की गई। बैठक में आगामी 11 अक्टूबर को होने वाले 1008 समोसरण महामंडल विधान सहित अन्य धार्मिक एवं सामाजिक विषयों पर चर्चा की गई। बैठक का संचालन जैन समाज के अध्यक्ष विनोद जैन एवं श्री विद्या पूर्ण वर्षा योग समिति के अध्यक्ष राजीव जैन ने किया।

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