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उत्तराखंड आवास विकास परिषद ने अवैध निर्माण के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए सौ से अधिक नोटिस जारी किए

देहरादून। उत्तराखण्ड आवास विकास परिषद द्वारा अनधिकृत निर्माणों के विरुद्ध संचालित अभियान के अंतर्गत हरिद्वार में तीन अनधिकृत निर्माणों को सील किया गया। यह कार्रवाई परिषद के अपर आवास आयुक्त दिनेश प्रताप सिंह द्वारा पारित सीलिंग आदेशों के अनुपालन में की गई।
परिषद की प्रर्वतन टीम द्वारा हरिद्वार के रानीपुर मोड़ स्थित राजेन्द्र अग्रवाल के बेसमेंट में किए गए निर्माण को सील किया गया। इसके अतिरिक्त शिवालिक नगर, हरिद्वार में प्रदीप चैहान के चार मंजिले भवन तथा श्री पंकज चैहान के दो तल के भवन को भी सील किया गया। निर्माणकर्ताओं को पूर्व में नियमानुसार शमन की कार्रवाई करने तथा अनधिकृत निर्माण के संबंध में आवश्यक कदम उठाने के पर्याप्त अवसर प्रदान किए गए थे। इसके बावजूद उनके द्वारा शमन हेतु आवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया तथा निर्माण कार्य जारी रखा गया। इस पर नियमानुसार प्रवर्तन कार्रवाई करते हुए उक्त निर्माणों को सील किया गया। इस संबंध में अपर आवास आयुक्त डीपी  सिंह ने स्पष्ट किया कि मानचित्र स्वीकृति के बिना किए जा रहे अनधिकृत निर्माणों के विरुद्ध सीलिंग एवं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नियमानुसार निरंतर जारी रहेगी।
उन्होंने कहा कि भवन निर्माण संबंधी नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करना परिषद की प्राथमिकता है। किसी भी निर्माणकर्ता को बिना आवश्यक स्वीकृति के निर्माण कार्य करने अथवा नियमों का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि अनधिकृत निर्माणों के मामलों में यदि किसी कार्मिक की संलिप्तता अथवा लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित कार्मिक के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। परिषद द्वारा अनधिकृत निर्माणों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने तथा नियोजित विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रवर्तन कार्रवाई को प्राथमिकता दी जा रही है।
आज हुई सीलिंग की कार्रवाई के दौरान विनोद कुमार चैहान, प्रभारी अधिशासी अभियन्ता, आकांक्षा चैहान, सहायक अभियन्ता, अनुज कुमार सैनी, कनिष्ठ अभियन्ता, पवन तथा पीआरडी जवान उमेश कुमार उपस्थित रहे। उत्तराखण्ड आवास विकास परिषद ने समस्त निर्माणकर्ताओं से अपील की है कि वे निर्माण कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व सक्षम प्राधिकारी से मानचित्र स्वीकृत कराना सुनिश्चित करें तथा स्वीकृत मानचित्र एवं प्रचलित भवन निर्माण नियमों के अनुरूप ही निर्माण करें। नियमों का उल्लंघन किए जाने की स्थिति में संबंधित निर्माण के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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