राजनीति

तो नई राजनैतिक पारी की तैयारी में हैं शिक्षक नेता के के डिमरी!

तो नई राजनैतिक पारी की तैयारी में हैं शिक्षक नेता कमल किशोर डिमरी!

राजकीय शिक्षक संघ के पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष और गणित के अध्यापक कमल किशोर डिमरी ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने का बड़ा फैसला लिया है। उनका यह निर्णय न केवल शिक्षक समुदाय, बल्कि उत्तराखंड की राजनीतिक हलक़ों में भी चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि उनकी सेवा अवधि अभी काफी शेष बताई जा रही है।
उत्तराखंड आंदोलन के सक्रिय आंदोलनकारी रहे डिमरी का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। राज्य निर्माण आंदोलन के दौरान उनके पैर में गोली भी लगी थी, जो उनके जुझारूपन और समर्पण का प्रमाण है। इसके साथ ही वे गोपेश्वर पीजी कॉलेज में पूर्व मेँ अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी अपनी भूमिका निभा चुके हैं।

अब उनके VRS लेने के फैसले को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। क्या यह केवल व्यक्तिगत कारणों से लिया गया निर्णय है, या फिर इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संकेत छिपा है? सियासी गलियारों में चर्चा है कि बद्रीनाथ विधानसभा सीट से उनकी दावेदारी को देखते हुए यह कदम एक रणनीतिक तैयारी भी हो सकता है। सत्ताधारी दल से उनकी नजदीकियां भी इन अटकलों को हवा दे रही हैं।
शिक्षा विभाग को VRS के जरिए छोड़ने का उनका फैसला ऐसे समय में आया है, जब राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या कमल किशोर डिमरी अब सक्रिय राजनीति में नई पारी शुरू करने जा रहे हैं?
फिलहाल, के के डिमरी की ओर से इस फैसले के पीछे की स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है, लेकिन इतना तय है कि उनका यह कदम आने वाले समय में उत्तराखंड की राजनीति में नई दिशा तय कर सकता है। अब सभी की नजरें उनके अगले कदम पर टिकी हैं।

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